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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, मनमोहन सिंह जी की जयंती पर विशेष लेख

 


*गनपत राय मोहनपुरिया*

डा. मनमोहन सिंह जी का जन्म 26 सितम्बर 1932 को सरदार गुरुमुख सिंह जी,माता श्रीमती अमृत कौर जी के परिवार मे गाह पाकिस्तान मे हुआ ,देश विभाजन मे भारत मे अमृतसर मे आ गये। आप 1982 से1985 तक भारत के रिजर्व बैंक के गर्वनर रहे। भारत के शिक्षित प्रधान मंत्री राजीव गांधी ने अर्थशास्त्र के अध्यापक, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र आनर्स, ऑक्सफोर्ड से डी.फिल की उपाधि प्राप्त ईमानदार, शिक्षित, डा मनमोहनसिंह जी को भारतीय योजना आयोग का उपाध्यक्ष बना कर सम्पूर्ण अधिकार दिये। 

लोकप्रिय, समाजवाद नीति की पैरोकार इंदिरा गांधी जी ने डा. मनमोहन सिंह जी को वाणिज्य मंत्रालय मे आर्थिक सलाहकार बना कर दुनिया के देशो मे यह संदेश दिया देश मे विकास जनता के लिये होगा। नेहरू गांधी परिवार आजादी के आन्दोलन के मूल्यो को स्थापित करना नहीं चूकते थे यह परिवार आपस मे बैठ कर देश निमार्ण, विदेश नीति,लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता को जोड कर  आर्थिक  नीतियो पर चर्चा करते थे। 

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा जी अपनी आत्म कथा 'ए'  प्रामिस लैंड मे भारत के बुद्धिमान,  विचारवान, अंत्यत ईमानदार राज नेता बताया, अमेरीका की एक संस्था ने दुनियाभर के 50 राजनेताओ मे से ईमानदार प्रथम बताया।  शिक्षित व्यक्तित्व की पहचान ईमानदार, पढा लिखा ही कदर जानता है।                                  

जर्मन की चांसलर ऐजेंला मकेंल जी ने भारत की अर्थ व्यवस्था को आमूलचूल विकास करने वाला प्रधानमंत्री मानती थी। सोनिया गांधी जी ने डा. मनमोहन सिंह जी को भारत का प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव 18 मई 2004 मे कांग्रेस और यू पी ए गठबंधन और वामपंथी दलो से कार्यक्रम के आधार पर बनाने का पत्र राष्ट्रपति जी सौपा, डा मनमोहनसिंह जी 22  मई को भारत के प्रधान मंत्री बने।        

डा. मनमोहन सिंह जी ने वित्त मंत्री  पी चिदंबरम जी, प्रणव मुखर्जी जी,  रक्षा मंत्री ए के एंटनी जी, प्रधान मुखर्जी  ग्रह मंत्री  शिवराज पाटिल जी, पी चिदंबरम  जी, सुशील कुमार शिंदे जी. बेहतरी ईमानदार अर्थशास्त्री सरदार मोंटेक सिंह आहलुवालिया जी योजना आयोग के उपाध्यक्ष लगातार 2004-2014 तक रहे।                    

यह दौर ऐसा था भारत मे DP लगातार बेहतर थी सरकार को प्रचार भी नहीं करना पडता था, राजीव गांधी जी और डा. मनमोहन सिंह जी के प्रधान मंत्री काल मे सरकारी कर्मचारियो को स्टीक मंहगाई के अनुसार  डी ए मिले, वेतन आयोग ने अच्छा वेतन बढाया यह दोनो सरकारी कर्मचारी रहे थे।  डा मनमोहनसिंह जी ने सरकारी कर्मचारियो को दस साल बाद पे स्केल पदोन्नती के  नियमानुसार अनुसार दो. पद रिक्त होने पर सीट भी दो इससे सरकारी कर्मचारियो को आर्थिक लाभ हुआ मनमोहन सिंह जी ने उच्च शिक्षा को सस्ता रखा लोगो को सरकारी नौकरिया मिल रही थी, उच्च शिक्षा लेकर घरो मे नहीं बैठ रहे थे सरकारीकरण राष्ट्रीयकरण की नीति से पढ कर विदेशो मे नौकरिया की, आज करोडो लोग डालर भेज कर अपने परिवार और देश को मजबूत कर रहे है।                   

साम्राज्यवादी ताकतो ने कैसा प्रयोग किया या उपयोग किया। *डा.मनमोहन सिंह जी के समय कच्चा तेल 140-147 डालर बैरल से आयात अंतरराष्ट्रीय मूल्यो पर खरीद रहे थे।  जनता को  65-72 रूपया बेच रहे थे। सरकार सब्सिडी दे रही थी, सरकार काम जनता को निचौडना नहीं राहत देना होता।                            

2008 मे योरोप के देशो के बैंक फेल हो रहे थे। भारत मे अजीत ङोभाल जी की संस्था विवेकानंद फांउडेशन साथ अन्ना हजारे जी इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन मे एस गुरूमंत्र जी, राजदूत सतीश चंद्र जी, पूर्व सेनाध्यक्ष एन सी विच जी, नृपेन मिश्रा जी, वर्तमान मे सरकार मे प्रमुख संस्था से जुडे है।    

अरविंद केजरीवाल जी कुमार विश्वास जी मनीष सिसोदिया ,प्रशांत भूषण जी शांतिभूषण जी एक ईमानदार सरकार के बाद सरकार बनवाने के लिए काम किया। 2015 मे तेल के भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार मे 40-60 बैरल डालर मिलने लगा।  सरकार ने तेल मंहगा बेचा। डा. मनमोहन सिंह जी सरकार चलाते थे, चुप रहते थे, प्रैस कान्फ्रेंस करते थे। लोकतंत्र और सम्मान का ध्यान रखते थे।                     

डा. मनमोहन सिंह जी वित्त मंत्री जी के कार्यकाल मे श्री राहुल खुल्लर जी IAS जी ने मुझे (गनपत राय मोहनपुरिया) को मिलने के लिए बुलाया, मै पन्नालाल सिंगाडिया जी और मेरा भाई लोकेंद्र मोहनपूरिया मिलने गये।  डा. मनमोहन सिंह जी राहुल खुल्लर जी IAS खडे खडे बातचीत कर रहे थे मै थोडा दूर कमरे मे खडे हुये थे एकदम डा. मनमोहन सिंह को छोड़कर  खुल्लर साहेब आ गये दोनो ही शालीन ईमानदार थे।            

राहुल खुल्लर जी से पन्नालाल जी और भाई लोकेंद्र से परिचय करवाया, राहुल खुल्लर जी ने कहा मै कल अमेरिका वर्ड बैंक जा रहा हूं कोई भी काम हो बताए। मैने धन्यवाद किया तो कहा छोटे भाई का कोई भी काम बताए मैने फिर धन्यवाद किया। यह सब सरकारी नौकरी से पहचान मिली।                               

मै डा. मनमोहन सिंह जी और राहुल खुल्लर जी को श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं।    

 डिस्क्लेमर : इस लेख में लेखक की अपनी सोच, अनुभव और दृष्टिकोण पर आधारित हैं। लेखक के विचारों से समाजहित एक्सप्रेस का सहमत होना ज़रूरी नहीं है।         


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